दो गर्म चुत

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वैम्पायर कुटुंब – अलौकिक लंड और दो गर्म चुत

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मंगलोर के घने जंगलो में , तारिणी और निशा भटक चुके थे। “यार तारिणी तू भी हद करती है , तेरे एडवेंचर के चकर में हम दोनों को कोई जंगली जानवर आज खा जायेगा। ”

तारिणी ने हस्ते हुए कहा , “हाँ हाँ , जंगली जानवर की नज़र तुझपर ज़रूर होगी। तेरे बूब्स जो इतने बड़े और रसीले है। ”

“तुजे मज़ाक कैसे सूज रहा है इस वक़्त। रास्ता मिलने की कोई उम्मीद नहीं है मुझे। ”

“ओये चुप , ऐसी अशुभ बाते मत कर , पता नहीं कौन इस वक़्त हमारी बाते सुन रहा होगा। ”

“तू तो मुझे और भी डरा रही है और अब दर के मारे मुझे सुसु आ रही है। ”

“करले करले , यहाँ कुछ देर हम रुक भी जाते है। ”

निशा अपनी पंत उतारकर मूतने बैठ गई और तारिणी उसे देख रही थी। “अबे तूने अपनी चुत के बाल क्यों निकाले। यहाँ जंगल में कौन चोदने वाला है तुजे ?”

“कामिनी उस तरफ देख ना , मुझे मुत्ता हुआ क्यों देख रही है ?”

“क्या फर्क पड़ता है यार , मेरे पास कोनसा लंड है तेरा रेप करने के लिए। ”

हस्ते हुए निशा ने जवाब दिया , “काश होता तेरे पास लंड , बहुत दिनों से मज़ेदार चुदाई नहीं हुई मेरी। ”

“तुजे ऐसे मूतते हुए देखकर मुझे भी अब आ रही है। ”

तारिणी भी अपनी पैंट खोलकर सुसु करने बैठ गई , निशा ने उसकी चुत को देख कर कहा , “तूने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है। जब घर पहुचेंगे तो सबसे पहले तेरी चुत को वैक्स करुँगी। ”

“ठीक है , करलेना। अच्छा सुन मुझसे कुछ पूछने का मन कर रहा है तुजसे। ”

“पुछले। ”

“अपनी चुत चाटने देगी ?”

“क्या ? ये अचानक क्या होगया तुजे। ” हस्ते हुए निशा ने कहा तारिणी से।

“पता नहीं यार , पर सच्च तेरी मस्त चुत को चाटने का मन कर रहा है। ”

“ऐसे मत बोल मेरी चुत गीली हो रही है। ”

फिर तारिणी निशा के पास गई और उसे लेटाकर उसने निशा की दोनों टैंगो को फैलादिया। निशा की चुत हल्का हल्का पानी छोड़ रही थी , तारिणी उसकी चुत को चाटने लगी और निशा को मज़ा आने लगा। “आह , आह ! अबे क्या चाटती है तू , बहुत मज़ा आ रहा है। ”

तारिणी निशा के ऊपर आई और उसकी टीशर्ट को भी खोल दिया , निशा के बड़े बड़े मुम्मे हिलते हुए बहार निकले और उसके निप्पल पूरी तरह से टाइट हो चुके थे। तारिणी उन्हें चूसते हुए दबाने लगी।

वह दोनों चुदाई के नशे में मग्न होचुके थे , उन्हें इस बात का ज़रा सा भी आभास नहीं हुआ की उन्हें कोई देख रहा था। जब निशा अपने हाथो और पेरो के सहारे कुत्ती बानी ताकि तारिणी उसे पीछे से चाटे, तब निशा की नज़र उस आदमी पर गई जो उन्हें चोदता हुआ देख रहा था।

निशा तब घबराकर सावधान होगई और तारिणी सामने आगई। दोनों ने जल्दी से बस अपने कपडे पहने , लेकिन वह आदमी उनके पास नहीं आया। वह बस थोड़ी दूर खड़ा उन्हें देख रहा था। कपडे पूरी तरह पहनने के बाद , निशा ने उस आदमी को कहा , “हमारे पास बन्दूक है , तो हमे किसी तरह का नुकसान पोछने की सोचना भी मत। अगर तुम हमे यहाँ से बहार निकलने का रास्ता बताओगे तो हम तुम्हे पैसे देंगे। ”

निशा ने धीरे के तारिणी के कानो में कहा , “इसे पेसो की क्या ज़रूरत हो सकती है , इतने घने जंगल में रहता है ये। ”

“तू इसके कपडे देख रही है ? क्या तुजे कही से भी ये कोई साधारण गांव वाला लग रहा है ? ये ज़रूर कोई सुमुगलर होगा जो पुलिस से छुपकर इस जंगल में रह रहा है। ”

तारिणी ने दोबारा उससे पूछा , “जवाब दो ? या यहाँ से निकलते बनो, वार्ना में गन निकालकर गोली चला दूंगी। ”

तब उस आदमी ने जवाब दिया , “गोली चलने की कोई ज़रूरत नहीं है। मेरा नाम सामरी है और में इस जंगल में रहता हु। आप दोनों को मुझसे घबराने की बिलकुल ज़रूरत नहीं है, अगर आपको ठीक लगे तो में वह आकर मिलना चाहता हु।”

जैसे ही सामरी उनके पास आया उन्होंने उसे ठीक से देखा , दिखने में सामरी बहुत खूबसूरत था। लम्बी कद काठी , काले घने बाल और गहरी भूरी आखे। उम्र उसकी करीबन ३२ साल की लग रही थी। उसकी सुंदरता को देख कर दोनों लड़कियों को हलकी राहत मिली। सामरी ने पूछा , “आप दोनों इतने गहरे जंगल में कैसे आगये?”

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तारिणी ने उसे बताया , “हमे उषा गुफा की तलाश थी , उसे ढूंढ़ते हुए हम रास्ता भटक गए है। ”

“अरे तब तो आप बिलकुल भी चिंता मत कीजिये , मेरा घर बस उषा गुफा के पास ही है। ”

दोनों लड़किया ये बात सुनकर ख़ुशी से उछाल पड़ी और फिर सामरी के साथ उषा गुफा की तरफ निकल पड़ी। रस्ते में सामरी ने उन्हें जंगल के बारे में बहुत सी बाते बताई और वह लोग गुफा के पास पहुँच गए। गुफा के आसपास का नज़ारा काफी खूबसूरत था , प्रकृति की सुंदरता ने निशा और तारिणी को पूरी तरह मोहित कर दिया था। गुफा से लगकर जो झरना था , वह निशा और तारिणी ने जाकर नहाने की सोची।

सामरी , “हाँ हाँ , आप लोग जाये और आनद ले , में आपके लिए खाने की तैयारी करता हु। ”

निशा , “सामरी आप बहुत ही अच्छे इंसान हो। ”

दोनों लड़कियों ने दोबारा अपने सारे कपडे खोल दिए और वह झरने के नीचे जाकर नहाने लगी , दोबारा उन दोनों का चुदाई करने का मन हुआ और वह चूमा चाटी करने लगी।

तब अचानक सामरी भी पानी में उतरा और उन दोनों के साथ चुम्मा चाती करने लगा। तारिणी , “बस इसी का इंतज़ार था , तुमपर शुरवात से नज़र थी हमारी। ”

निशा , “अपना लंड महसूस करवाओ। ”

जब निशा ने सामरी का लंड अपने हाथो में लिया तो वह हैरान होगई , उसका लंड बहुत लम्बा और मोटा था , “ऐसा लंड मेने आज तक कभी नहीं देखा। ”

“जिसतरह से मैं तुम दोनों को चोदने वाला हु , वैसी चुदाई भी तुम्हारी आज तक कभी नहीं हुई होगी। ”

“हम तैयार है। ”

पानी के झरने के नीचे से निकलकर वह तीनो किनारे पर लेट गए , सबसे पहले सामरी ने तारिणी की चुत को चाटना और चूसना शुरू किया , वह अपनी टैंगो को फैलाकर उसके चेहरे पर बैठी थी।

निशा मज़े से उसका लंड चूस रही थी , उसका मोटा लंड निशा ने अपने दोनों हाथो से पकड़ रखा था और उसने अपने मुँह में पूरी तरह लेने की कोशिश कर रही थी। जब निशा से और रुका नहीं गया तब वह सामरी के लंड पर बैठ गई और चुदने लगी। “आह , उफ़ !” करते हुए वह सामरी का लंड अपनी चुत के अंदर ले रही थी।

निशा को इस अनोखे लंड का इतना मज़ा लेता हुआ देख तारिणी से भी रहा नहीं गया और वह झुक कर तैयार होगई ताकि सामरी अपना लंड उसकी चुत में पीछे से डाले। तारिणी की मस्त गांड को दबाते हुए और अपना लंड उसकी चुत पर रगड़कर सामरी ने लंड अंदर डाला और तारिणी की चीख निकल आई। “आह !”

फिर सामरी ने तारिणी को काफी ज़बरदस्त तरिकी से चोदा , तारिणी के नीचे निशा भी लेटी थी अपनी टैंगो को फैलाकर , “muje भी थोड़ा और मज़ा दो ना अपने मस्त लंड का। ”

सामरी ने लंड को तारिणी की चुत से निकालकर निशा की चुत में डाला और उसे चोदने लगा , तारिणी अब अपनी चुत को निशा से चटवा रही थी और सामरी को चुम रही थी।

सामरी का लंड निशा की चुत में झड़ गया।

अचंबाव की बात यह थी की लंड जब चुत से बहार निकला तब भी वह तना हुआ था। दोनों लड़किया इस चीज़ को देख कर हैरान थी। निशा ने कहा , “लगता है ये इस जंगल की किसी अनोखी जड़ीबूटी का कमाल है। ”

तारिणी , “हाँ , मुझे भी यही लगता है। ”

“haha , ये किसी जड़ीबूटी का कमाल नहीं , मेरे एक खास राज़ का कमाल है। ”

निशा , “केसा राज़ ?”

“तुम दोनों को बहुत भूक लगी होगी ना इस चुदाई के बाद ?”

तारिणी , “हाँ काफी ज़्यादा , लेकिन सच बताऊ तो मन अब भी नहीं भरा है मेरा तो। मुझे तुमसे और चुदना है। ”

“ज़रूर , हम लोग और चुदाई करेंगे। लेकिन पहले तुम दोनों कुछ खालो। ”

वहा से आगे बढ़कर तीनो घर के भीतर गए। सामरी का लकड़ी से बना वो मकान काफी ज़्यादा आलीशान था , उसने अपने हाथो ने बनाया हुआ बहुत ही लाजवाब भोजन दोनों लड़कियों को करवाया। खाना खाते हुए तारिणी ने सामरी से पूछा , “क्या तुम्हे भूक नहीं लगी ? तुम क्यों नहीं खा रहे कुछ भी। तुम्हे तो बहुत ज़्यादा भूक लगनी चाहिए जिस तरीके से तुमने हमे चोदा है। ”

“हम्म , लगता है अब वक़्त आगया है की में अपना राज़ तुम दोनों को बतादू। ”

निशा , “हाँ , मैं तो तड़प रही हु जान्ने के लिए की तुम इतने रहस्यमई क्यों हो। ”

“देखो निशा और तारिणी , असलियत में मैं एक वैम्पायर हु। ”

जैसे ही सामरी ने ये बात कही , कुछ पल के लिए तो उस कमरे में एक सन्नाटा सा छा गया। निशा और तारिणी एक दूसरे की तरफ देखते रहे और फिर ज़ोर से हस पड़े , “क्या ? तुम और एक वैम्पायर ?”

निशा , “तुम्हारे जैसा हटा कटा खूबसूरत नौजवान एक वैम्पायर ?”

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तारिणी , “अरे पगली उसमे क्या है , वैम्पायर तो वैसे भी कभी बूढ़े नही होते और दिखने में काफी आकर्षित होते है। ”

सामरी , “बिलकुल सही तारिणी। ”

तारिणी , “लेकिन पता है तुम एक वैम्पायर क्यों नही हो सकते ? क्युकी तुम हमे सूरज की रौशनी जब आकाश में थी तब मिले थे। ”

ये बात सुनकर सामरी ज़ोर ज़ोर से हसने लगा और दोनों लड़किया भी , ये सोचकर की सामरी मज़ाक ही कर रहा था। लेकिन फिर हस्ते हस्ते सामरी ने उन्हें बताया , “पगलियो इसीलिए तो में इस लाल चन्दन की लड़कियों वाले घने जंगल में रहता हु , ताकि सूर्यकिरणे मुज पर ना गिरे। और अब तो रात का अँधेरा इतना घना है की मैं तुम्हे… ”

फिर अचानक सामरी एक खूंखार और भयानक वैम्पायर में तब्दिल होगया। लड़िया ज़ोरो से चीखी लेकिन उसने उन दोनों के गलो को चलनी कर दिया और उनके जिस्म का पूरा खून चूस लिया।

कुछ ही देर में तारिणी और निशा का एक नया जन्म हुआ , उनकी खूबसूरती चार गुना बढ़ चुकी थी। उनके स्तनों में बढ़त हो चुकी थी और कमर और भी ज़्यादा सुडोल। वह हद से ज़्यादा आकर्शित हो चुकी थी।

सामरी से उन्हें देख कर कहा , “आओ मेरी रानियों , इस नए जीवन में तुम्हारा स्वागत है। आज से मेरा वैम्पायर कुटुंब पूरा हुआ , आओ मेरे बच्चो और अपनी माओ के भरे हुए स्तनों से दूध का सेवन करो।

फिर कही सारे चमगादड़ आये और निशा और तारिणी के स्तनों से चिपक गए। वह उनके उभरे स्तनों से दूध चूसने लगे और निशा और तारिणी के अंदर एक नई हवस और खून की प्यास ने जन्म लिया।

वह हर अमावस की रात अलग – अलग शहरों में जाती और मर्दो को अपनी और आकर्शित करती थी। वह मर्दो के साथ सम्भोग करती थी और उनका खून चूस लेती थी।

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मेरी अगली कहानी का शीर्षक है “ठुकाई के मज़े लो

तो आप सब अपना ख्याल रखिएगा। कोविड का सिचुएशन है तो अपना विशेष ख्याल रखिएगा।  नमस्कार।

धन्यवाद।

The End.

 

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